मुंबई: 90 के दशक में ‘जतिन-ललित’ की जोड़ी ने बॉलीवुड को कई यादगार रोमांटिक गाने दिए थे। उसी ललित पंडित का अब भक्ति संगीत की तरफ आना दिखाता है कि वो कितने तरह का संगीत बना सकते हैं। उनकी प्रतिभा वाकई कमाल की है। मशहूर संगीतकार ललित पंडित ने गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर शिरडी साईं बाबा की भक्ति में डूबा अपना नया और विशेष भजन “साईं नाम सांचा” (Sai Naam Saacha) आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। मुंबई में आयोजित एक भव्य लॉन्च समारोह में इस आध्यात्मिक भजन का अनावरण किया गया, जिसमें बॉलीवुड और भारतीय संगीत उद्योग के कई दिग्गज सितारे शामिल हुए।
मुख्य विशेषताएं और लॉन्च इवेंट
- शुभ अवसर पर रिलीज: यह भजन गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर साईं बाबा और सभी गुरुओं के चरणों में समर्पित किया गया है।
- दिग्गज गायकों का संगम: इस रचना में भारतीय संगीत जगत के शीर्ष गायकों—उदित नारायण, शान, हरिहरन और जावेद अली ने अपनी जादुई आवाज़ दी है।
- सह-गायक व युवा प्रतिभाएं: बहुप्रतिभाशाली बेला शेंडे और खुद ललित पंडित के साथ-साथ Gen Z की नई प्रतिभाओं—अकासा, स्वर्ग शर्मा और सांजली खाडिकर को भी इस भजन में शामिल किया गया है।
- भव्य लॉन्च समारोह: मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में गायक शान, उदित नारायण और मशहूर निर्माता रमेश तौरानी मौजूद रहे। इन सभी दिग्गजों ने ललित पंडित की इस दिल छू लेने वाली धुन और आध्यात्मिक रचना की जमकर तारीफ की।
भजन के पीछे की प्रेरणा
ललित पंडित ने बताया कि हाल ही में जब वे अपने बेटों के संगीतमय सफर और करियर के लिए आशीर्वाद मांगने शिरडी साईं बाबा के दर्शन करने गए थे, तब उनके मन में साईं बाबा के लिए एक अनूठा और सदाबहार भजन बनाने का विचार आया। उन्होंने इस रचना को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुओं और साईं बाबा के चरणों में एक भक्ति-भेंट के रूप में अर्पित किया है। इस भजन का संगीत पुराने भारतीय वाद्य यंत्रों और नए आधुनिक साउंड का शानदार मिश्रण है। इसी वजह से ये भजन हर उम्र के लोगों को पसंद आएगा।
कलाकारों के भावुक अनुभव
- गायक शान का व्यक्तिगत जुड़ाव: शान ने रिकॉर्डिंग के पलों को याद करते हुए साझा किया कि उनकी दिवंगत मां साईं बाबा की बहुत बड़ी भक्त थीं, इसलिए यह भजन उनके लिए केवल एक गाना नहीं बल्कि बेहद भावुक और खास आध्यात्मिक अनुभव है।
- युवा पीढ़ी (Gen Z) को जोड़ने की पहल: ललित पंडित ने इस भजन में दिग्गजों के साथ युवाओं को इसलिए मौका दिया है ताकि आज की युवा पीढ़ी में भक्ति, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति के प्रति जुड़ाव और गहरा हो सके।


