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मुंबई में मराठा आंदोलन तेज़, मनोज जरांगे पाटिल का अनिश्चितकालीन उपवास जारी, समर्थक मंत्रालय घेरने की कोशिश में

मराठा आंदोलन मुंबई में और भड़क उठा है। आंदोलनकारियों का लक्ष्य मंत्रालय (महाराष्ट्र की सत्ता का केंद्र) को घेरना दिख रहा है। भगवा गमछे पहने प्रदर्शनकारी अलग-अलग रास्तों से मंत्रालय की ओर बढ़ रहे हैं और पुलिस उन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही। जगह-जगह रास्ता रोको किया जा रहा है, यहां तक कि हाईकोर्ट के सामने भी।

लोग पूछ रहे हैं—क्या मुंबई पुलिस ने मराठा आंदोलनकारियों को रोकने की कोशिश छोड़ दी है या उन्हें ढील देने के आदेश मिले हैं?

आजाद मैदान में हजारों समर्थक डटे हुए हैं। वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहे हैं। माहौल पूरी तरह बेकाबू दिख रहा है। DN रोड पर अंजुमन-ए-इस्लाम स्कूल के पास गाड़ियाँ रोकी जा रही हैं और चालकों को मजबूर किया जा रहा है कि गाड़ियाँ उल्टी दिशा में घुमा लें। महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों से आई सैकड़ों गाड़ियाँ DN रोड और आसपास की सड़कों पर खड़ी कर दी गई हैं। सीएसटी के पास BEST बसें रोकी जा रही हैं, यात्रियों को उतार दिया जा रहा है और ड्राइवरों को मजबूर किया जा रहा है कि वे आंदोलनकारियों को मंत्रालय तक छोड़ें।

मुंबई में अफरा-तफरी, मंत्रालय निशाने पर

पुलिस लगभग नदारद है। एक वाहन चालक सहदेव मेहता ने सवाल उठाया—“मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है, लेकिन शहर के बीचोबीच क़ानून व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं दिख रही।”

मनोज जरांगे पाटिल का ऐलान—मांग पूरी होने तक मैदान नहीं छोड़ेंगे

मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल (43) ने शनिवार को साफ कहा कि वे और उनके समर्थक आजाद मैदान नहीं छोड़ेंगे जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती। उन्होंने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर “ग़लत जानकारी फैलाने” का आरोप लगाया और कहा—“मैंने कभी नहीं कहा कि ओबीसी के 10 प्रतिशत आरक्षण में से हिस्सा काटकर मराठाओं को दिया जाए। मैं सिर्फ यही कह रहा हूँ कि हमें कुनबी ओबीसी वर्ग में शामिल किया जाए ताकि हमें आरक्षण का लाभ अपने आप मिल सके।”

सरकार बेबस, आंदोलन बेकाबू

जरांगे पाटिल का अनिश्चितकालीन उपवास जारी है और हज़ारों समर्थक शहर में मौजूद हैं। सरकार पूरी तरह बेबस नज़र आ रही है। लाखों मुंबईकर इस आंदोलन से परेशान हैं और राज्य सरकार मूक दर्शक बनी हुई है। हालात और भी उलझे हैं क्योंकि सत्ताधारी महायुति गठबंधन के कुछ मराठा नेता भी जरांगे पाटिल का समर्थन कर रहे हैं।

वहीं, ओबीसी समुदाय ने भी चेतावनी दी है कि अगर मराठाओं को ओबीसी में शामिल किया गया तो वे भी आंदोलन करेंगे। ऐसे में स्थिति और बिगड़ सकती है। कांग्रेस नेता मांग कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाया गया 50% आरक्षण की सीमा हटाई जाए, लेकिन यह इतना आसान नहीं है।

News Desk

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