व्यवसाय

हैटसन एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने डेयरी सेक्टर के लिए जीएसटी सुधार का स्वागत किया, बताया ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम

मुंबई, 5 सितम्बर 2025: देश की प्रमुख डेयरी कंपनी हैटसन एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने सरकार द्वारा डेयरी सेक्टर में किए गए जीएसटी सुधार का गर्मजोशी से स्वागत किया है। कंपनी ने कहा कि यह निर्णय किसानों, उपभोक्ताओं और संगठित डेयरी उद्योग—सभी के लिए लाभकारी साबित होगा।

कंपनी का मानना है कि दूध और डेयरी उत्पादों पर कम जीएसटी दरें लागू होने से इनकी क़ीमतें किफ़ायती होंगी, गाँवों में किसानों की आय बढ़ेगी और उद्योग को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का माहौल मिलेगा।

करोड़ों लोगों को सीधा लाभ

भारत की आबादी का हर व्यक्ति दूध से किसी न किसी रूप में जुड़ा है—किसान, उपभोक्ता या ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनकर। इसलिए यह सुधार सीधे तौर पर 80 मिलियन (8 करोड़) दुग्ध उत्पादकों और 1.45 अरब उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा।

कंपनी ने इस दूरदर्शी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और जीएसटी काउंसिल का आभार व्यक्त किया।

चेयरमैन आर. जी. चंद्रमोहन का बयान

हैटसन एग्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड के चेयरमैन श्री आर. जी. चंद्रमोहन ने कहा:
“यह अभूतपूर्व और दूरदर्शी सुधार है। दूध उत्पादों और आइसक्रीम जैसे प्रमुख वर्गों में जीएसटी की कमी वास्तव में एक वरदान है। यह सुधार किसानों को सशक्त करेगा, उपभोक्ताओं को सस्ती और पौष्टिक चीज़ें उपलब्ध कराएगा और पारदर्शी सप्लाई चेन को मजबूत करेगा। भारत अब आयातक से निर्यातक बनने की दिशा में और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।”

प्रमुख लाभ (हैटसन एग्रो की नज़र से)

  • उपभोक्ताओं के लिए: कम टैक्स का मतलब है कि पैकेज्ड दूध और डेयरी उत्पाद अब ज्यादा किफ़ायती और आसानी से उपलब्ध होंगे।
  • किसानों के लिए: दूध की बेहतर कीमत मिलने से करोड़ों किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
  • उद्योग के लिए: ब्रांडेड और अनब्रांडेड दोनों उत्पादों पर एक जैसी टैक्स दर से लेवल प्लेइंग फील्ड मिलेगा। इससे मिलावट और बाज़ार की गड़बड़ियों में कमी आएगी और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुँचेंगे।
  • अर्थव्यवस्था के लिए: मांग बढ़ने, संगठित क्षेत्र के विस्तार और निर्यात में बढ़ोतरी से देश की खाद्य सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत होंगी।

सरकार की आय पर असर नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार से सरकार की राजस्व वसूली पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। पैकेज्ड और संगठित उत्पादों की माँग बढ़ने से टैक्स संग्रह संतुलित रहेगा और दीर्घकाल में सरकार को अधिक मूल्य प्राप्त होगा।

भविष्य की दिशा

इस सुधार से डेयरी सेक्टर में नई ऊर्जा आएगी। किसान, उपभोक्ता और उद्योग—सभी को लाभ मिलने के साथ भारत का डेयरी उद्योग “दुनिया का डेयरी पावरहाउस” बनने की दिशा में और आगे बढ़ेगा।

News Desk

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