मुंबई के उपनगर मालाड में स्थित मालवणी का राजा श्री सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल ४/५ इस साल अपना हीरक महोत्सव बड़े धूमधाम से मना रहा है। यह मंडल 1966 में स्थापित हुआ था और इसे मालाड का सबसे पुराना गणेश मंडल माना जाता है।
संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारी
मंडल सिर्फ गणेशोत्सव मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने वाले कई कार्यक्रम भी करता है। बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक कार्यक्रम और खेल प्रतियोगिताएं, तो वहीं महिलाओं के लिए खास आकर्षण वाला खेल ‘पैठणी’ आयोजित किया जाता है। इन कार्यक्रमों से हर उम्र के लोग इसमें शामिल हो पाते हैं।
सभी धर्मों की भागीदारी
इस मंडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर जाति और धर्म के लोगों को साथ लेकर काम करता है। गणपति के आगमन से लेकर विसर्जन तक हर काम में अलग-अलग धर्मों के कार्यकर्ता सक्रिय रहते हैं। इसी कारण मालवणी का राजा को सर्वधर्म समभाव का प्रतीक माना जाता है।
कार्यकर्ताओं का योगदान
हीरक महोत्सव के मौके पर मंडल के हर कार्यकर्ता ने अपने व्यक्तिगत खर्च से 6,000 रुपये सहयोग निधि दी है। यह मंडल की एकजुटता और निस्वार्थ भावना को दर्शाता है।
आकर्षक सजावट और भव्य प्रवेशद्वार
इस साल मंडल ने बप्पा के लिए विशेष सजावट, भव्य मंच और सुंदर प्रवेशद्वार तैयार किया है। मंडल के अध्यक्ष सतीश चवाथे ने बताया, “60 साल पहले मंडल की स्थापना हुई थी और तब से अब तक बिना रुके हर साल गणेशोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।”
समाज के लिए प्रेरणा
मालाड का यह पहला मंडल आज भी समाज के लिए एक मिसाल है। सामाजिक जिम्मेदारी, सभी धर्मों की भागीदारी और संस्कृति का सम्मान—इन तीन स्तंभों पर चलने वाला यह मंडल आज भी लोगों के लिए प्रेरणादायी है।



