मुंबई में मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान ब्रिहन्मुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) ने आज़ाद मैदान और उसके आसपास से 125 टन से ज़्यादा कचरा इकट्ठा किया। यह आंदोलन 29 अगस्त से शुरू हुआ था और मंगलवार को समाप्त हुआ, जब राज्य सरकार ने आंदोलनकारी मनोहर जरांगे (मनोज जरांगे पाटिल) की ज़्यादातर मांगें मान लीं।
आंदोलन के दौरान बनी अस्थायी बस्तियाँ
आज़ाद मैदान आंदोलन का केंद्र रहा। इसके आसपास का इलाका, जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और BMC मुख्यालय, अस्थायी कैंप साइट्स में बदल गए थे।
हजारों की संख्या में पहुंचे लोग यहाँ खाना पकाते, खाते, सोते और नहाते नज़र आए। इस वजह से यहाँ बड़ी मात्रा में कचरा जमा हुआ।
कचरे में बचा हुआ खाना, प्लास्टिक की बोतलें, पेपर प्लेट, कप और रैपर शामिल थे।

BMC की सफाई कार्रवाई
BMC अधिकारियों ने बताया कि:
- 29 अगस्त को आंदोलन के पहले दिन 4 टन कचरा इकट्ठा हुआ।
- 30 अगस्त को 7 टन कचरा उठाया गया।
- 31 अगस्त और 1 सितंबर को करीब 30-30 टन कचरा साफ किया गया।
- 2 सितंबर को सबसे ज्यादा 57 टन कचरा जमा हुआ।
कुल मिलाकर पांच दिनों में 125 टन से ज़्यादा कचरा आज़ाद मैदान और आसपास से हटाया गया।
आंदोलन का समापन
मनोहर जरांगे ने 29 अगस्त को अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया था। उन्होंने मंगलवार दोपहर उपवास तोड़ा, जब सरकार ने उनकी ज्यादातर मांगें स्वीकार कर लीं।
मराठा समाज से जुड़े हजारों लोग इस आंदोलन का हिस्सा बने, जिसके चलते दक्षिण मुंबई का बड़ा हिस्सा कई दिनों तक प्रभावित रहा।



