जीवन शैली

जमील मर्चेंट: महालक्ष्मी रेस कोर्स में जमील मर्चेंट की साहबज़ादी, युमना की आलीशान शादी का जश्न

मुंबई एक बेहद शानदार जश्न का गवाह बना जब जमील मर्चेंट की साहबज़ादी, युमना, बिलाल के साथ निकाह के बंधन में बंधीं। इस निकाह के बाद मुंबई के ऐतिहासिक महालक्ष्मी रेस कोर्स में एक बेहद भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया गया। शनिवार, 3 जनवरी 2026 को आयोजित यह प्रोग्राम इस साल की सबसे चर्चित महफिलों में से एक रहा, जिसमें भारत और दुनिया भर से नामचीन हस्तियों ने शिरकत की।

यह जश्न नफासत और बेहतरीन मेहमाननवाज़ी की एक मिसाल था, जो मर्चेंट परिवार की पहचान रही है। मर्चेंट खानदान का नाम व्यापारिक, सामाजिक और नागरिक हलकों में बेहद एहतराम (सम्मान) के साथ लिया जाता है। महालक्ष्मी रेस कोर्स के वसीअ (विशाल) मैदान को एक खूबसूरत नज़ारे में तब्दील कर दिया गया था, जहाँ फूलों की सजावट और रोशनी के तालमेल ने एक शाही एहसास पैदा किया।

मुल्क के असरदार शख्सियतों का जमावड़ा

यह रिसेप्शन रसूख और ग्लैमर का एक सच्चा संगम साबित हुआ। इसमें भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता, बॉलीवुड के मशहूर चेहरे, बड़े उद्योगपति और कई अंतरराष्ट्रीय मेहमान शामिल हुए। मेहमानों की इस फेहरिस्त से मर्चेंट परिवार के गहरे ताल्लुकात और समाज में उनकी ऊंची साख का अंदाज़ा होता है।

जहाँ बॉलीवुड सितारों ने शाम की चमक बढ़ाई, वहीं सीनियर लीडर्स और बड़े बिजनेसमैन आपस में गुफ्तगू करते नज़र आए। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की मौजूदगी ने इस जश्न को एक वैश्विक पहचान दी और परिवार की दूर-दूर तक फैली शोहरत को उजागर किया।

ज़ायके और संस्कृति का मेल

मेहमानों के लिए खान-पान का भी खास इंतज़ाम था। यहाँ रिवायती लजीज़ पकवानों के साथ-साथ ग्लोबल कुज़ीन (विदेशी व्यंजन) भी परोसे गए, जिन्हें बहुत बारीकी से चुना गया था। युमना और बिलाल की यह शादी सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि तहज़ीब और समुदायों के मिलन का एक खूबसूरत मंज़र था।

जश्न से आगे: जमील मर्चेंट की सामाजिक और कानूनी जद्दोजहद

शादी की रौनक के साथ-साथ मर्चेंट परिवार अपनी सामाजिक और कानूनी सक्रियता के लिए भी चर्चा में रहता है। मुंबई के मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता जमील मर्चेंट कौम और समाज के हकों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं।

हाल ही में वे उस वक्त सुर्खियों में आए जब उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। वे उन पाँच मुख्य याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं जो भारतीय मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों की हिफाज़त के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

जमील मर्चेंट की मुख्य सरगर्मियाँ:

  • वक्फ कानून के खिलाफ जंग: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना।
  • सोशल मीडिया पर लगाम: इंटरनेट पर फैलने वाली नफरत और अपमानजनक सामग्री के खिलाफ कानूनी शिकायतें दर्ज कराना।
  • जनहित के मुद्दे: मुंबई के मलाड इलाके में नागरिक समस्याओं को सुलझाना और पुलों के विध्वंस जैसे मुद्दों पर जनहित याचिका (PIL) दायर करना।

एक ऐसा परिवार जो खुशियों के साथ फर्ज़ भी निभाता है

महालक्ष्मी रेस कोर्स में हुआ यह जश्न न केवल खुशी और शालीनता का प्रतीक था, बल्कि उस परिवार की झलक भी था जो सामाजिक जिम्मेदारी और अवाम की खिदमत में यकीन रखता है। मर्चेंट परिवार अपनी निजी खुशियों को मनाने के साथ-साथ समाज के प्रति अपने फर्ज़ को भी बखूबी अंजाम दे रहा है।

News Desk

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