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ईद-ए-मिलाद-उन-नबी पर लाउडस्पीकर की अनुमति सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक

इस साल की ईद-ए-मिलाद-उन-नबी (Eid-e-Milad-un-Nabi) का खास महत्व है, क्योंकि यह पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद ﷺ की पैदाइश को पूरे 1500 साल पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर है।

ईद-ए-मिलाद के मौके पर पुलिस की गाइडलाइन जारी

मुंबई पुलिस ने ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर अहम जानकारी दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि त्योहार के दिन लाउडस्पीकर सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।

इसके साथ ही जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए तय रूट और समय का पालन करना अनिवार्य होगा। पुलिस ने आयोजकों से अपील की है कि सजावट, लाइटिंग और मंचीय कार्यक्रम शांति और भाईचारे के संदेश के साथ आयोजित किए जाएँ।

चूँकि इस साल ईद-ए-मिलाद और गणेश विसर्जन की तारीख़ें पास-पास आ रही हैं, इसलिए समुदाय के नेताओं ने आपसी सहमति से 8 सितम्बर 2025 को जुलूस निकालने का फैसला लिया है। यह कदम हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सौहार्द का प्रतीक है।

पुलिस विभाग ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि त्योहार शांति और सुरक्षित माहौल में मनाया जाए। ट्रैफिक पुलिस की ओर से भी विशेष इंतज़ाम किए जाएँगे ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

8 सितम्बर को बड़े पैमाने पर आयोजन

मुस्लिम समुदाय ने आपसी सहमति से ईद-ए-मिलाद का जुलूस और बड़े कार्यक्रम 8 सितम्बर 2025, सोमवार को करने का फैसला किया है। असल तारीख 5 सितम्बर 2025, शुक्रवार थी, लेकिन चूँकि 6 सितम्बर को गणेश विसर्जन का बड़ा कार्यक्रम है, इसलिए टकराव और भीड़ से बचने के लिए मौलाना, इमाम, क़ारी, हाफ़िज़ और मुफ़्ती जैसे धर्मगुरुओं ने मिलकर यह निर्णय लिया। यह कदम हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच भाईचारे और सहयोग की मिसाल पेश करता है।

रोशनी, सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम

8 सितम्बर को मुंबई और महाराष्ट्र के कई इलाकों में विशाल जुलूस, सजावट, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की उम्मीद है। मस्जिदों और घरों को रोशनी से सजाया जाएगा, नबी ﷺ के संदेशों पर भाषण होंगे और भाईचारे का पैग़ाम दिया जाएगा।

शांति और भाईचारे का संदेश

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी सिर्फ़ मुस्लिम समुदाय का त्योहार नहीं है, बल्कि यह शांति, मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम सबको देता है। दुनिया भर में यह दिन नमाज़, जुलूस, ख़ैरात और रोशनी के साथ मनाया जाता है।

इस साल का 1500वाँ जश्न इतिहास में एक खास मुकाम रखेगा, जहाँ सभी धर्मों के लोग मिलकर शांति और भाईचारे का संदेश आगे बढ़ाएँगे।

News Desk

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